बाघों से लेकर घड़ियालों तक संरक्षण कार्यों की ली जानकारी, वन्यजीव आवास, गश्ती व्यवस्था, जैव विविधता संरक्षण और चम्बल में घड़ियाल संरक्षण गतिविधियों का किया स्थलीय निरीक्षण, अधिकारियों को दिए आवश्यक दिशा-निर्देश
सवाई माधोपुर। राजस्थान के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF) एवं वन बल प्रमुख (HoFF) अरिजीत बनर्जी ने रणथम्भौर टाइगर रिजर्व और पालीघाट क्षेत्र का दो दिवसीय विस्तृत निरीक्षण कर वन्यजीव संरक्षण गतिविधियों की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने बाघ संरक्षण, वन्यजीव आवास प्रबंधन, जैव विविधता संरक्षण, गश्ती व्यवस्था और घड़ियाल संरक्षण कार्यक्रमों का स्थलीय अवलोकन किया।

दौरे के पहले दिन बनर्जी ने रणथम्भौर टाइगर रिजर्व के विभिन्न महत्वपूर्ण वन क्षेत्रों का भ्रमण किया। उन्होंने प्राकृतिक जल स्रोतों, एनीकटों, वन्यजीवों के लिए विकसित जल प्रबंधन संरचनाओं, कैमरा ट्रैप मॉनिटरिंग व्यवस्था और संरक्षण गतिविधियों का निरीक्षण किया। अधिकारियों से बाघों की वर्तमान स्थिति, उनके विचरण क्षेत्र, मॉनिटरिंग प्रणाली तथा मानव-वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम संबंधी उपायों की विस्तृत जानकारी भी प्राप्त की।
उन्होंने फील्ड स्टाफ द्वारा की जा रही नियमित गश्त, आधुनिक तकनीकों के उपयोग और वन अपराध नियंत्रण के प्रयासों की समीक्षा करते हुए संरक्षण कार्यों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सतर्कता बनाए रखने के निर्देश दिए। दूसरे दिन बनर्जी ने पालीघाट क्षेत्र पहुंचकर चम्बल नदी में संचालित घड़ियाल संरक्षण कार्यक्रमों का निरीक्षण किया।

उन्होंने घड़ियाल नेस्टिंग स्थलों, नवजात घड़ियाल शिशुओं की सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी तंत्र का जायजा लिया तथा प्राकृतिक आवासों के संरक्षण को और मजबूत बनाने पर बल दिया। उन्होंने अधिकारियों और वन कर्मियों के समर्पण एवं कठिन परिस्थितियों में किए जा रहे संरक्षण प्रयासों की सराहना करते हुए वन्यजीव संरक्षण को और प्रभावी बनाने का आह्वान किया।
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