श्रीमाधोपुर में वन विभाग की नाकाबंदी में चार आरोपी पकड़े, बंदूक और झाऊ चूहे के कांटे भी मिले
मांस और अंगों की बिक्री के लिए शिकार करने की आशंका, तीन आरोपी 16 अक्टूबर तक रिमांड पर
सीकर। वन्यजीवों के अवैध शिकार के खिलाफ कार्रवाई करते हुए वन विभाग की टीम ने श्रीमाधोपुर में अजीतगढ़ रोड पर एक बस की तलाशी लेकर 18 जीवित पाटागोह, औषधीय वन उपज शतावरी और शिकार में इस्तेमाल होने वाले औजार बरामद किए हैं। मामले में चार आरोपियों को पकड़ा गया है। इनमें से तीन आरोपियों को न्यायालय में पेश कर 16 अक्टूबर तक रिमांड पर लिया गया है, जबकि एक बाल अपचारी को किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष पेश किया गया।
उप वन संरक्षक सीकर प्रदीप कुमार के निर्देशन में सहायक वन संरक्षक मुख्यालय कीर्ति राठौड़ के पर्यवेक्षण और क्षेत्रीय वन अधिकारी जितेंद्र सिंह चौधरी के नेतृत्व में टीम ने रेंज कार्यालय श्रीमाधोपुर के पास जालपाली-अजीतगढ़ रोड पर नाकाबंदी की। इस दौरान बस संख्या RJ09PA2776 को रुकवाकर तलाशी ली गई। बस की डिक्की में दो प्लास्टिक कट्टों में 18 जीवित पाटागोह, एक कट्टे में शतावरी और लोहे के दो कुरसे मिले, जिनका उपयोग पाटागोह के बिल खोदने में किया जाता था।
बंदूक और शिकार के अवशेष भी बरामद
वन विभाग ने मामले में नागौर जिले के नेमाराम, लादूराम, रामचंद्र और कोमरेड बावरिया को पकड़ा। जांच के दौरान रामचंद्र की निशानदेही पर चीपलाटा स्थित सोहन बावरिया के घर से एक टोपीदार बंदूक और शिकार किए गए झाऊ चूहे के कांटे भी बरामद किए गए।
मांस और अंग बेचने के लिए शिकार
प्रारंभिक जांच के अनुसार, आरोपियों ने पाटागोह का शिकार मांस खाने और बेचने के साथ उनके अंगों की बिक्री के उद्देश्य से करने की बात बताई। वहीं, शतावरी को औषधीय उपयोग के लिए 200 रुपए प्रति किलोग्राम की दर से बेचने की जानकारी सामने आई है।
वन विभाग ने वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 और राजस्थान वन अधिनियम, 1953 के तहत मामला दर्ज कर अनुसंधान शुरू किया है। विभाग के अनुसार, संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत तीन से सात वर्ष तक के कारावास और 25 हजार रुपए जुर्माने का प्रावधान है। कार्रवाई में सीकर वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की टीम शामिल रही।
