भोपाल। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी), केंद्रीय क्षेत्रीय पीठ, भोपाल ने जयपुर रोपवे परियोजना से संबंधित वन भूमि पर कथित अवैध व्यावसायिक गतिविधियों एवं अतिक्रमण के मामले में महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं।
3 अगस्त को मूल आवेदन संख्या 103/2025 (सीज़ेड) की सुनवाई के दौरान अधिकरण ने वन विभाग तथा संयुक्त समिति की रिपोर्टों में सामने आए गंभीर तथ्यों का संज्ञान लिया।अधिकरण ने उल्लेख किया कि रोपवे का अपर स्टेशन, लोअर स्टेशन तथा रोपवे कॉरिडोर उस वन भूमि पर निर्मित प्रतीत होते हैं जो परियोजना के लिए विधिवत स्वीकृत एवं डायवर्ट की गई भूमि से अलग तथा आरक्षित वन क्षेत्र में स्थित है।
अधिकरण ने सहायक वन संरक्षक द्वारा चिन्हित अनेक उल्लंघनों का भी उल्लेख किया, जिनमें बिना अनुमति रेस्तरां, फिश स्पा एवं बॉडी मसाज पार्लर का संचालन, खुले में आग जलाकर भोजन बनाना, प्लास्टिक कचरे का अनुचित निस्तारण, अनधिकृत प्रकाश व्यवस्था तथा पर्यावरण एवं सुरक्षा स्वीकृतियों के बिना जिपलाइन साइकिल राइड का संचालन शामिल है।
अधिकरण ने इस बात पर गंभीर चिंता व्यक्त की कि मामला एक वर्ष से अधिक समय से लंबित होने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। इसके बाद अधिकरण ने राजस्थान के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) को मामले की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करने का निर्देश दिया। साथ ही यह भी बताया गया कि संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रारंभ कर दी गई है।
एनजीटी ने वन विभाग को निर्देश दिया कि आवंटित भूमि से बाहर स्थित वन भूमि की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, कथित अतिक्रमित वन भूमि का कब्जा वापस लिया जाए तथा दोषी अधिकारियों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई की जाए। अधिकरण ने यह भी निर्देश दिया कि पीसीसीएफ अथवा उनके द्वारा अधिकृत मुख्य वन संरक्षक (सीसीएफ) स्तर से कम न होने वाला अधिकारी दो सप्ताह के भीतर शपथपत्र के साथ कार्यवाही प्रतिवेदन (Action Taken Report) प्रस्तुत करे। मामले की अगली सुनवाई 31 अगस्त को निर्धारित की गई है।
