पहली बार दिखेगा मानसिंह महल का गुप्त टांका, बारादरी के नीचे मिली वर्षा जल संग्रहण की प्राचीन संरचना, छतों और खुले गलियारों का पानी सहेजने के लिए बनाई गई थी खास व्यवस्था
जयपुर। 400 वर्ष पहले राजस्थान के राजा-महाराजा भी जल संरक्षण की महत्ता समझते थे। इसका प्रमाण आमेर महल स्थित मानसिंह महल की बारादरी के नीचे मिली प्राचीन जल संग्रहण संरचना है। संरक्षण कार्य के दौरान सामने आए इस टांके की झलक अब पहली बार पर्यटक देख सकेंगे।
बारिश की हर बूंद सहेजने की थी वैज्ञानिक व्यवस्था
महाराजा मानसिंह के शासनकाल (1589-1614 ई.) में निर्मित मानसिंह महल, आमेर महल का सबसे प्राचीन हिस्सा माना जाता है। महल चौक स्थित बारादरी के नीचे बना यह टाँका तत्कालीन जल प्रबंधन की उन्नत समझ को दर्शाता है। इसकी खासियत यह थी कि महल की छतों, भूतल के खुले गलियारों और चौकों से वर्षा जल एकत्र होकर इसमें पहुंचता था।
गंदगी रोकने से लेकर अतिरिक्त पानी निकालने तक का इंतजाम
आमेर महल के अधीक्षक राकेश छोलक ने का कहना है कि इस प्राचीन संरचना में पानी को साफ रखने के लिए भी विशेष व्यवस्था की गई थी। टांके के मध्य बने चौकोर कुंड में पानी के साथ आने वाली मिट्टी और गंदगी बैठ जाती थी। इसके बाद पानी मोरी के माध्यम से आगे बढ़कर टांके में संग्रहित होता था। टांके के पूर्वी हिस्से में बने छोटे चैंबर का उद्देश्य भी मिट्टी और कचरे को अलग करना था।
टांके की सफाई के दौरान पानी निकालने के लिए अलग मोरी बनाई गई थी, जिसे जल संग्रहण के समय बंद कर दिया जाता था। वहीं, टांका भर जाने पर अतिरिक्त पानी की निकासी के लिए भी व्यवस्था थी, जिससे पानी मावठे की ओर पहुंचता था।
संरक्षण कार्य में सामने आई ऐतिहासिक संरचना
बारादरी के पूर्वी हिस्से में पाथ-वे के पत्थर और पट्टियां हटाने पर यह संरचना उजागर हुई। अब तक आमेर आने वाले अधिकांश पर्यटक, गाइड और विषय विशेषज्ञ भी इससे अनजान थे। इस ऐतिहासिक धरोहर को सामने लाने में आमेर महल अधीक्षक डॉ. राकेश छोलक, आमेर विकास एवं प्रबंधन प्राधिकरण के अभियंताओं और संरक्षण कार्य कर रही फर्म मैसर्स विप्रांशु एंटरप्राइजेज की महत्वपूर्ण भूमिका रही। यह टांका बताता है कि सदियों पहले भी जल संरक्षण केवल जरूरत नहीं, बल्कि स्थापत्य कला और दूरदर्शी सोच का अभिन्न हिस्सा था।
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