जयपुर में गूंजा ‘नंद के आनंद भयो’, मंदिरों में उमड़ा आस्था का सैलाब

गोविंद देवजी से गुप्त वृन्दावन तक कृष्ण जन्मोत्सव की धूम, मध्यरात्रि में हुआ कान्हा का महाभिषेक

जयपुर। छोटी काशी शुक्रवार को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर पूरी तरह भक्ति और आस्था के रंग में रंगी नजर आई। रिमझिम बारिश के बीच सुबह से देर रात तक श्रद्धालु शहर के विभिन्न मंदिरों में ठाकुरजी के दर्शन के लिए पहुंचे। कृष्ण मंदिरों के साथ शिव, हनुमान और अन्य देवालयों में भी जन्माष्टमी उत्साह और श्रद्धा से मनाई गई। मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, अभिषेक, श्रृंगार, भजन-कीर्तन और झांकियों के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की कतारें लगी रहीं। मध्यरात्रि में ‘नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ के जयघोष से मंदिर परिसर गूंज उठे।

गोविंद देवजी मंदिर में विशेष आयोजन
छोटी काशी के आराध्य ठाकुर श्री गोविंद देवजी मंदिर में महंत अंजन कुमार गोस्वामी महाराज के सान्निध्य में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महापर्व मनाया गया। विशेष पूजा-अर्चना और श्रृंगार के साथ भक्तों ने ठाकुरजी के दर्शन किए।

गुप्त वृन्दावन धाम में हजारों श्रद्धालु पहुंचे
जगतपुरा स्थित गुप्त वृन्दावन धाम में यशोदानंदन के जन्मोत्सव को लेकर विशेष सजावट की गई। सुबह 6:30, 11 बजे, शाम 4:30 और रात 10 बजे ठाकुरजी का अभिषेक हुआ। मध्यरात्रि में पंचामृत से महाभिषेक कर 108 विशेष व्यंजनों का भोग लगाया गया। कृष्ण-बलराम ने वृन्दावन के कारीगरों द्वारा तैयार विशेष मखमली पोशाक धारण की। पूरे दिन हरे कृष्ण महामंत्र का जप और कीर्तन चलता रहा। जन्म के साथ महाआरती हुई।

पद गायन से रिझाया राधा सरस बिहारी सरकार को
श्री शुक संप्रदाय आचार्य पीठ श्री सरस निकुंज में पीठाधीश्वर अलबेली माधुरी शरण जी महाराज के सान्निध्य में जन्मोत्सव मनाया गया। रात 8 बजे से जन्माष्टमी के पदों का गायन हुआ। मध्यरात्रि अभिषेक के बाद प्रसाद और पंचामृत वितरित किया गया।

गोपीनाथ जी मंदिर में देर रात तक दर्शन
पुरानी बस्ती स्थित श्री राधागोपीनाथ जी मंदिर में महंत सिद्धार्थ गोस्वामी के सान्निध्य में विशेष श्रृंगार हुआ। शाम से देर रात तक भक्तों का तांता लगा रहा और मध्यरात्रि में जन्माभिषेक किया गया।

मुरली मनोहर मंदिर में हुआ विष्णु सहस्त्रनाम पाठ
गंगापोल बाहर बदनपुरा स्थित मंदिर श्री मुरली मनोहर जी में श्री वेंकटेश देवस्थान न्यास की ओर से जन्माष्टमी महोत्सव हुआ। स्वामी राघवेन्द्राचार्य के सान्निध्य में श्रीमद्भागवत, विष्णु सहस्त्रनाम और भगवद्गीता का पारायण, भजन संध्या, हवन, कथा, अभिषेक और आरती हुई। श्रद्धालुओं को पंचामृत व पंजीरी प्रसाद वितरित किया गया। 6 सितंबर को नन्दोत्सव का आयोजन होगा।

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