‘टाइगर री-इंट्रोडक्शन : अवसर एवं चुनौतियां’ विषय पर राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित, भविष्य की रणनीतियों पर हुआ मंथन
अलवर। सरिस्का टाइगर रिजर्व एक बार फिर देश में बाघ संरक्षण और पुनर्स्थापन की दिशा में राष्ट्रीय चर्चा का केंद्र बना। रविवार को अलवर स्थित सरोवर प्रीमियर में “टाइगर री-इंट्रोडक्शन : अवसर एवं चुनौतियां” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यक्रम का आयोजन राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA), पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय तथा राजस्थान वन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।
कार्यशाला का उद्घाटन केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेन्द्र यादव ने किया, जबकि राजस्थान के वन मंत्री संजय शर्मा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर देशभर के वरिष्ठ वन अधिकारी, प्रधान मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक, क्षेत्र निदेशक और वन्यजीव विशेषज्ञ शामिल हुए।
उद्घाटन सत्र में सरिस्का टाइगर रिजर्व और देश में बाघ पुनर्स्थापन कार्यक्रम की उपलब्धियों पर आधारित विशेष फिल्म प्रदर्शित की गई तथा कई महत्वपूर्ण प्रकाशनों का विमोचन किया गया।

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री भूपेन्द्र यादव ने सरिस्का को देश में बाघ पुनर्स्थापन की सफल मिसाल बताते हुए कहा कि विभिन्न राज्यों के अनुभवों का आदान-प्रदान भविष्य की संरक्षण रणनीतियों को और अधिक प्रभावी बनाएगा। तकनीकी सत्र में राजस्थान, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तराखण्ड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, झारखण्ड, मिजोरम, कर्नाटक और तेलंगाना सहित कई राज्यों ने बाघ पुनर्स्थापन से जुड़े अनुभव, चुनौतियां और भावी योजनाएं प्रस्तुत कीं।
मध्यप्रदेश द्वारा चीता पुनर्स्थापन कार्यक्रम पर विशेष प्रस्तुति दी गई, जबकि भारतीय वन्यजीव संस्थान ने गौर और बारहसिंगा पुनर्स्थापन के माध्यम से शिकार आधार मजबूत करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। समापन सत्र में बाघ-विहीन या कम बाघ संख्या वाले संरक्षित क्षेत्रों में सक्रिय प्रबंधन और पुनर्स्थापन के लिए भावी कार्ययोजना पर चर्चा की गई।
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