पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग और आईजीएनसीए की संयुक्त कार्यशाला के दूसरे दिन विशेषज्ञों ने किया जंतर मंतर का विस्तृत स्थलीय निरीक्षण
संरक्षण, प्रलेखन और प्रबंधन रणनीतियों पर बनी सहमति, तैयार होगी दीर्घकालिक संरक्षण योजना
जयपुर। यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल जंतर मंतर वेधशाला में मंगलवार को संरक्षण विशेषज्ञों की टीम ने जंतर मंतर स्मारक का निरीक्षण किया। यह निरीक्षण तीन दिवसीय कार्यशाला के अंतर्गत हुआ, जिसका आयोजन पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग एवं इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र #IGNCA के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है।
इस स्मारक निरीक्षण का नेतृत्व स्मारक की अधीक्षक प्रतिभा यादव ने किया। उन्होंने टीम के साथ जंतर मंतर के प्रत्येक खगोलीय यंत्र (Yantra) का बारीकी से अध्ययन किया। यंत्रों की संरचना, मापन तकनीक, दिशा-संरेखण और संरक्षण की स्थिति पर विशेषज्ञों ने गहन समीक्षा की। कार्यशाला में पुरातत्व विभाग के अधिकारियों ने राकेश छोलक, सरोजनी चंचलानी, महेंद्र कुमार निम्हल, सोहन लाल चौधरी सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

डॉ. मुकेश शर्मा ने इस दौरान जंतर मंतर की वैज्ञानिक उपयोगिता और स्थापत्य तकनीक की जानकारी देते हुए बताया कि सवाई जयसिंह द्वितीय का यह योगदान भारत की पारंपरिक वैज्ञानिक और खगोलीय परंपरा का गौरवशाली उदाहरण है।
निरीक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने कई प्रमुख बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित किया
- आगंतुकों की आवाजाही और स्थल प्रबंधन की रणनीति, पत्थर संरचनाओं में क्षरण और धातु चिह्नों पर जंग की समस्या
- डिजिटल डॉक्यूमेंटेशन, मैपिंग और साइनज सुधार की आवश्यकता
- पूर्व संरक्षण कार्यों की समीक्षा और संग्रहालयीय प्रस्तुति के उन्नयन के सुझाव
निरीक्षण के बाद हुई ब्रेनस्टॉर्मिंग बैठक में विशेषज्ञों ने संरक्षण से जुड़ी सिफारिशें साझा कीं। इन सुझावों को एक दीर्घकालिक संरक्षण एवं प्रबंधन योजना Long-Term Conservation Management Plan में शामिल किया जाएगा। कार्यशाला का समापन बुधवार को होगा, जिसमें अंतिम रिपोर्ट पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग को प्रस्तुत की जाएगी।
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