रेगिस्तान की रहस्यमयी शिकारी को नया सहारा : रणथम्भौर से शुरू हुआ ‘प्रोजेक्ट काराकल’

विश्व काराकल दिवस पर राजस्थान वन विभाग की बड़ी पहल, देश की सबसे दुर्लभ जंगली बिल्ली के संरक्षण को मिलेगा नया जीवन

जयपुर। भारत की सबसे दुर्लभ और रहस्यमयी जंगली बिल्लियों में शामिल काराकल के संरक्षण के लिए राजस्थान वन विभाग ने ऐतिहासिक कदम उठाते हुए ‘प्रोजेक्ट काराकल’ की शुरुआत की है। विश्व काराकल दिवस के अवसर पर लॉन्च की गई इस महत्वाकांक्षी परियोजना का पहला केंद्र ग्रेटर रणथम्भौर लैंडस्केप को बनाया गया है, जिसे देश में काराकल का प्रमुख और अंतिम सुरक्षित आश्रय माना जाता है।

काराकल अपनी तेज रफ्तार, अद्भुत छलांग लगाने की क्षमता और कानों पर मौजूद काले गुच्छेदार बालों के कारण वन्यजीव प्रेमियों के बीच विशेष पहचान रखता है। यह दुर्लभ प्रजाति खुले वन क्षेत्रों, झाड़ीदार इलाकों और घासभूमि पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण संकेतक मानी जाती है। वन विभाग के अनुसार, ‘प्रोजेक्ट काराकल’ के तहत इस संकटग्रस्त प्रजाति की वैज्ञानिक मॉनिटरिंग, मूवमेंट ट्रैकिंग, आवास संरक्षण और शिकार प्रजातियों के अध्ययन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

इससे काराकल की घटती संख्या को स्थिर करने और उसके प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी। उप वन संरक्षक मानस सिंह ने बताया कि यह पहल केवल एक वन्यजीव संरक्षण परियोजना नहीं, बल्कि रणथम्भौर क्षेत्र की जैव विविधता को सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि काराकल का संरक्षण भविष्य की पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक धरोहर बचाने जैसा है।

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