चंबल अभयारण्य में अवैध खनन पर सरकार का शिकंजा, 40 संवेदनशील स्थलों पर हाईटेक निगरानी

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की पालना तेज, एआई कैमरे-ड्रोन से निगरानी के साथ 200 सशस्त्र होमगार्ड जवान होंगे तैनात

जयपुर। राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में अवैध बालू-बजरी खनन और परिवहन पर रोक लगाने के लिए राज्य सरकार ने निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत कर दी है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों एवं केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) की सिफारिशों की पालना को लेकर बुधवार को मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में शासन सचिवालय में समीक्षा बैठक हुई। इसमें अब तक की अनुपालना और आगामी सुनवाई की तैयारियों की समीक्षा की गई।

सरकार के अनुसार अधिकांश महत्वपूर्ण बिंदुओं पर कार्रवाई पूरी हो चुकी है। वनकर्मियों को वैधानिक सुरक्षा देने के लिए बीएनएसएस-2023 के तहत अधिसूचना 13 अगस्त को जारी की जा चुकी है। वहीं जिला स्तर पर विभागों के बीच समन्वय के लिए ‘ज्वाइंट एसओपी’ लागू की गई है।

अभयारण्य के 40 अत्यधिक संवेदनशील स्थलों पर हाई-मास्ट टावर, ऑप्टिकल फाइबर तथा एआई और थर्मल नाइट विजन कैमरे लगाए जा रहे हैं। नदी के बदलते स्वरूप और नए मार्गों की पहचान के लिए ड्रोन सर्वे भी होंगे। इसके अलावा धौलपुर, सवाई माधोपुर, बूंदी, करौली और कोटा में चिन्हित 40 स्थलों पर 5-5 सशस्त्र होमगार्ड जवान, यानी कुल 200 जवान तैनात किए जाएंगे।

राजस्व, पुलिस, वन और खनन विभाग की संयुक्त टीमें सप्ताह में दो बार जीपीएस और बॉडी-वॉर्न कैमरों के साथ आकस्मिक निरीक्षण करेंगी। अवैध खनन की शिकायतों के लिए एआई आधारित ऑनलाइन डैशबोर्ड और राजस्थान संपर्क-181 पर क्यूआर कोड व्यवस्था भी तैयार की जा रही है।

मुख्य सचिव ने कहा कि चंबल की जैव विविधता, घड़ियाल और जलीय जीवों के प्राकृतिक आवास की सुरक्षा के लिए सरकार जीरो-टॉलरेंस नीति पर काम कर रही है।

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