अति संकटग्रस्त प्रजाति के संरक्षण में बड़ी सफलता, वन विभाग की सतर्क निगरानी से सुरक्षित हुए नेस्ट और नवजात हैचलिंग्स
पालीघाट। घड़ियाल संरक्षण की दिशा में पालीघाट क्षेत्र से बेहद उत्साहजनक खबर सामने आई है। पालीघाट स्थित चार नेस्ट से लगभग 100 घड़ियाल हैचलिंग्स के सफलतापूर्वक निकलने से वन विभाग और वन्यजीव प्रेमियों में खुशी की लहर है। यह उपलब्धि क्षेत्र में लगातार किए जा रहे संरक्षण और निगरानी प्रयासों का सकारात्मक परिणाम मानी जा रही है।
वन विभाग के अनुसार, घड़ियालों के नेस्ट और नवजात शिशुओं की सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। विभागीय टीम लगातार क्षेत्र में गश्त कर रही है तथा संवेदनशील स्थलों की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है ताकि किसी भी प्रकार के खतरे से हैचलिंग्स को सुरक्षित रखा जा सके। नदी तटों और नेस्टिंग साइट्स पर अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है।
वन विभाग ने स्थानीय ग्रामीणों और पर्यटकों से भी सहयोग की अपील की है। विभाग ने कहा है कि नदी किनारे और नेस्ट स्थलों के आसपास अनावश्यक गतिविधियों से बचें, ताकि घड़ियालों के प्राकृतिक आवास और नवजात शिशुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो। घड़ियाल विश्व की सबसे दुर्लभ और अति संकटग्रस्त जलीय प्रजातियों में शामिल है।
ऐसे में बड़ी संख्या में हैचलिंग्स का सुरक्षित निकलना न केवल चंबल क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता का संकेत है, बल्कि भविष्य में घड़ियालों की संख्या बढ़ाने की उम्मीद भी जगाता है।
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