नई दिल्ली। भारत के वन्यजीव संरक्षण अभियान में एक और स्वर्णिम अध्याय जुड़ा है। वर्ष 2024 में अधिसूचित गुरु घसीदास टमोर-पिंगला टाइगर रिज़र्व, जो देश का 56वां और तीसरा सबसे बड़ा टाइगर रिज़र्व है। यह रिज़र्व न केवल वन्यजीव संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक और सांस्कृतिक धरोहर का भी प्रतीक है।
इस टाइगर रिज़र्व में गुरु घसीदास राष्ट्रीय उद्यान शामिल है, जिसका नाम 19वीं सदी के समाज सुधारक और सतनामी समुदाय के संस्थापक गुरु घसीदास के नाम पर रखा गया है। वहीं टमोर-पिंगला वन्यजीव अभयारण्य का नाम टमोर पहाड़ी और पिंगला नाला से लिया गया है, जो इस क्षेत्र की भौगोलिक पहचान को दर्शाता है।
छोटा नागपुर और बघेलखंड पठार के हिस्सों में फैला यह विशाल क्षेत्र पहाड़ियों, पठारों और घाटियों से घिरा है। एक रणनीतिक वाइल्डलाइफ कॉरिडोर के रूप में यह न केवल बाघों, बल्कि कई संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण में अहम भूमिका निभा रहा है, जिससे क्षेत्र की जैव विविधता और पारिस्थितिक संतुलन को मजबूती मिल रही है। इस संबंध में #Ntca ने एक्स पर पोस्ट कर जानकारी दी है।
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