शीत ऋतु के स्वागत में विशेष झांकी और पारंपरिक भोग, ठाकुरजी को दस्ताने, मोजे और मफलर पहनाकर सुसज्जित किया गया
दर्शनार्थियों को वितरित हुआ खीचड़ा प्रसाद, मंदिर में दिनभर उत्साह
जयपुर। मार्गशीर्ष शुक्ल द्वादशी पर मंगलवार को व्यंजन द्वादशी का पर्व पूरे भक्तिभाव और परंपरा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर विभिन्न मंदिरों में ठाकुरजी को ऊष्मा देने वाले अनेक पारंपरिक व्यंजनों का भोग लगाया गया और इसी दिन से शीत ऋतु के अनुसार सेवा-दिनचर्या भी आरंभ हो गई। मुख्य आयोजन गोविंदधाम स्थित आराध्य देव गोविंद देवजी मंदिर में हुआ, जहां श्रीमन्माध्व गौड़ेश्वराचार्य महंत अंजन कुमार गोस्वामी महाराज के सान्निध्य में दोपहर को विशेष झांकी सजाई गई।
इस पावन अवसर पर ठाकुर श्रीगोविंद देवजी महाराज को 101 प्रकार के व्यंजन अर्पित किए गए, जिनमें छप्पन भोग और 25 प्रकार के कच्चे भोग शामिल थे। मेवा मिश्रित खीचड़ा, दाल के बड़े, अरबी भोग, माखन-मिश्री, रबड़ी, मालपुआ, बूंदी लड्डू, पराठे, कचौरी, मौसमी फल, सूखे मेवे और मठड़ी-नमकीन जैसे विविध व्यंजन भोग के प्रमुख आकर्षण रहे। दर्शन के लिए पहुंचे भक्तों को खीचड़ा प्रसाद वितरित किया गया।
उत्सव से पूर्व मंगला झांकी के बाद वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ ठाकुर श्रीजी का पंचामृत अभिषेक किया गया। इसके बाद उन्हें नवीन पीली केसरिया पोशाक, अंगरखी, विशेष अलंकार, दस्ताने, मोजे और मफलर धारण कराए गए। सेवाधिकारी मानस गोस्वामी ने बताया कि व्यंजन द्वादशी के साथ ही ठाकुरजी की दैनिक सेवा अब पूर्णतः शीतकालीन पद्धति में शुरू हो गई है, जो आगे इसी स्वरूप में जारी रहेगी।
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