चांदनी रात में झलकेगी भक्ति और सौंदर्य की अनूठी छटा
जयपुर। आश्विन शुक्ल पूर्णिमा पर सोमवार देशभर में शरद पूर्णिमा का पर्व श्रद्धा और उल्लास से मनाया जाएगा। मान्यता है कि इस रात चंद्रमा 16 कलाओं से युक्त होकर अमृत बरसाता है, जिसकी चांदनी में रखी खीर औषधीय गुणों से भर जाती है। इसी परंपरा के तहत घरों और मंदिरों में आज रात खीर बनाकर खुले आकाश में रखी जाएगी।
ज्योतिषाचार्य डॉ. महेन्द्र मिश्रा के अनुसार, इस वर्ष शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा मीन राशि में शनि के साथ रहेगा, जिससे उसकी किरणों का प्रभाव विशेष रूप से शुभ रहेगा।
गोविंद देवजी मंदिर में विशेष श्रृंगार
शहर के प्रमुख आराध्य गोविंद देवजी मंदिर में सुबह वेदमंत्रोच्चार के साथ पंचामृत अभिषेक होगा। ठाकुरजी को सफेद वस्त्र पहनाए जाएंगे और शाम 7:15 से विशेष शरदोत्सव झांकी सजाई जाएगी। खीर और खीरसा का भोग लगाकर भक्त चंद्रमा की उजली छटा में दर्शन करेंगे।
श्री सरस निकुंज और युगल कुटीर में भक्ति संगीत का संगम
सुभाष चौक स्थित श्री सरस निकुंज में केसरिया खीर का भोग और आचार्यों द्वारा पदगान होगा। वहीं चांदपोल स्थित युगल कुटीर में रात 8 से 11 बजे तक भक्ति संगीत और रास रचनाओं की प्रस्तुति रहेगी।
श्री सीतारामजी मंदिर में औषधीय खीर का वितरण
छोटी चौपड़ स्थित मंदिर में औषधीयुक्त खीर का भोग और वितरण होगा। जैसे ही चांद की किरणें खीर पर पड़ेंगी, भगवान राम-सीता को भोग लगाया जाएगा।
शहर के अन्य प्रमुख मंदिरों गोपीनाथजी, राधा दामोदर, लाड़लीजी, गलता तीर्थ और इस्कॉन में भी शरदोत्सव का उल्लास देखने को मिलेगा।
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