100 जन्म भी हों, मैं रजनीकांत ही बनना चाहूंगा : सुपरस्टार की भावुक प्रतिक्रिया

तमिल से हिंदी तक 170 से अधिक फिल्मों में अमर योगदान, पद्म विभूषण, दादा साहेब फाल्के सहित कई प्रतिष्ठित सम्मान

इफ्फी 2025 ने भारतीय सिनेमा के इस सांस्कृतिक आइकॉन को किया सलाम

नई दिल्ली। 56वें भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (इफ्फी) ने इस बार भारतीय सिनेमा की एक ऐतिहासिक उपलब्धि को सम्मानित किया। महान अभिनेता रजनीकांत को फिल्म इंडस्ट्री में 50 वर्ष पूरे करने पर विशेष सम्मान प्रदान किया गया। प्यार से थलाइवर कहलाने वाले रजनीकांत ने अपनी अनोखी स्टाइल, अटूट करिश्मे और दमदार अभिनय से दशकों तक दर्शकों को मंत्रमुग्ध रखा है।

इस सम्मान कार्यक्रम में रजनीकांत के तमिल सिनेमा के साथ-साथ हिंदी, तेलुगु और कन्नड़ फिल्मों में दिए गए असाधारण योगदान को भी सराहा गया। 170 से अधिक फिल्मों में निभाई गई भूमिकाओं के साथ उन्होंने भारतीय पॉपुलर कल्चर में अमिट छाप छोड़ी है। देश उन्हें पहले ही पद्म भूषण (2000), पद्म विभूषण (2016) और दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड (2020) से सम्मानित कर चुका है।

गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने उन्हें शॉल और मोमेंटो भेंट किया। इस मौके पर केंद्रीय मंत्री डॉ. एल. मुरुगन, आई&B सचिव संजय जाजू और अभिनेता रणवीर सिंह भी मौजूद रहे। सम्मान स्वीकार करते हुए रजनीकांत ने भावुक होकर कहा कि भले ही मैं 100 बार जन्म लूं, मैं रजनीकांत के रूप में ही पैदा होना चाहूंगा। उन्होंने कहा कि सिनेमा और अभिनय से उनका प्रेम ही 50 वर्षों को कुछ ही वर्षों जैसा महसूस कराता है।

इफ्फी 2025 ने इस सम्मान के जरिए यह संदेश मजबूत किया कि रजनीकांत सिर्फ अभिनेता नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक प्रतीक हैं जिनकी कला भाषा और सीमाओं से परे जाकर दुनियाभर के दर्शकों को प्रेरित करती है।

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