पुरातत्व विभाग और आईजीएनसीए की तीन दिवसीय कार्यशाला शुरू, विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव और तकनीकी दृष्टिकोण

जयपुर। राजस्थान राज्य पुरातत्व विभाग एवं इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) के संयुक्त तत्वावधान में सोमवार से तीन दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। कार्यशाला का उद्घाटन डॉ. पंकज धीरेंद्र ने किया, जिसमें उप निदेशक कृष्णकांता शर्मा, अधीक्षक जंतर मंतर प्रतिभा यादव, डॉ. रीमा हूजा, शिखा जैन, डॉ. अचल पांड्या, और डॉ. संजय धर उपस्थित रहे।

पहले दिन विशेषज्ञों ने जंतर मंतर की संरचनात्मक, ऐतिहासिक और तकनीकी संरक्षण आवश्यकताओं पर अपने विचार साझा किए। कार्यशाला में लिडार, फोटोग्रामेट्री, संरक्षण वास्तुशिल्प, कला संरक्षण, खगोल विज्ञान, एवं आपदा जोखिम प्रबंधन जैसे विषयों पर विशेष सत्र आयोजित किए गए।

डॉ. मुकेश शर्मा ने उपकरणों के खगोलीय महत्व पर प्रकाश डाला, डॉ. मणियासरण ने फोटोग्रामेट्री के प्रयोगों को समझाया, जबकि डॉ. कैलाश राव ने लिडार तकनीक व आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से पत्थर संरक्षण की संभावनाओं पर चर्चा की। शिखा जैन ने जंतर मंतर को यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने की यात्रा और प्रबंधन योजनाओं की जानकारी दी।

राजस्थान के विभिन्न स्मारकों आमेर महल, नाहरगढ़ दुर्ग , हवामहल स्मारक, अल्बर्ट हॉल के अधीक्षक भी कार्यशाला में शामिल हुए। अगले दो दिन यहां संरक्षण से जुड़ी चुनौतियों का विश्लेषण कर एक ठोस Conservation Plan तैयार करना है, जिसे राज्य पुरातत्व विभाग को प्रस्तुत किया जाएगा।

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