28वें लोकरंग महोत्सव के सातवें दिन लोक कला, संगीत और नृत्य का रहा मनमोहक संगम, दर्शक लोक संस्कृति की रंगीन छटा में हुए मंत्रमुग्ध
जयपुर। जवाहर कला केंद्र में चल रहे 28वें लोकरंग महोत्सव के सातवें दिन सोमवार को लोक कला और संगीत की सुरम्य शाम ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। बाड़मेर के बुंदु खान लंगा व समूह के पारंपरिक लंगा गायन ने ‘आयो रे हेली’ जैसे गीतों से समां बांधा, जबकि महाराष्ट्र के कलाकारों ने सौंगी मुखवटे नृत्य के जरिए अपने आराध्य की उपासना के भावपूर्ण दृश्य मंचित किए।
राजस्थान की युवा कलाकारों ने सिर पर जलती चरी रखकर संतुलन का अद्भुत प्रदर्शन किया, वहीं गुजरात के कलाकारों ने तलवार रास से देवी दुर्गा को समर्पित जोशपूर्ण प्रस्तुति दी। मयूर वेश में सजे कलाकारों ने गीत ‘मोरियो आच्छो बोल्यो रे’ पर मयूर नृत्य प्रस्तुत कर वर्षा ऋतु के स्वागत की आनंदमयी झलक दी।
हरियाणा के रोहतक से आए कलाकारों ने पारंपरिक घूमर नृत्य से दर्शकों को लोक लय में डुबो दिया। इसी बीच शिल्पग्राम में भी लोक रंगों की छटा बिखरी रही। जहां बालम छोटो सो, भवाई, चकरी, रावण हत्था वादन और फकीरा खान बिशाला मांगणियार समूह के गीतों ने लोक संस्कृति की आत्मा को सजीव कर दिया।
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