फूलों की होली से महका लोकरंग, भपंग की तानों ने रची सुरमयी शाम

लोकरंग महोत्सव के नौवें दिन देशभर की लोकधारा का संगम, दर्शक हुए मंत्रमुग्ध

जयपुर। जवाहर कला केन्द्र में जारी 28वें लोकरंग महोत्सव का बुधवार को नवां दिन लोक संस्कृति के रंगों से सराबोर रहा। देशभर से आए कलाकारों ने अपनी सुमधुर प्रस्तुतियों से दर्शकों को परंपरा, संगीत और नृत्य के अलौकिक संगम का अनुभव कराया।

शाम की शुरुआत महेशा राम एवं समूह ने भजन ‘मधुर सुर बोल कागा’ से की, जबकि गफूर खान मांगणियार ने खड़ताल, ढोलक और मोरचंग की संगत में पारंपरिक लोकसंगीत से माहौल को सजीव किया। लक्षद्वीप के कलाकारों का ‘कोलकली नृत्य’ समुद्री द्वीपों की संस्कृति की जीवंत झलक लेकर आया। वहीं कौशल कांत पंवार एवं समूह ने ‘गणगौर नृत्य’ के माध्यम से नारी शक्ति और भक्ति भाव को साकार किया।

यूसुफ खान मेवाती की भपंग वादन प्रस्तुति ‘फैशन पर करे रे कमाल’ ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। मध्यप्रदेश के कलाकारों का करमा नृत्य और सुरेन्द्र एवं शिष्यों का बालकों का चंग नृत्य लोक परंपरा की नई पीढ़ी को जोड़ने वाला संदेश लेकर आया।

गुजरात के मणियारो रास, झारखंड के छऊ नृत्य और राजस्थान की मनीषा शर्मा की ब्रज होली ने शाम को अविस्मरणीय बना दिया। फूलों की होली के रंगों और संगीत की सुरलहरियों से पूरा परिसर महक उठा।

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