ग्रामीण महिला उद्यमिता और पारंपरिक शिल्पकला को मिला नया मंच
जयपुर। राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद (राजीविका) द्वारा आयोजित सुमंगल–दीपावली मेला के चौथे दिन भी जयपुरवासियों का उत्साह देखने योग्य रहा। मेले में स्वयं सहायता समूह (SHG) की महिलाओं द्वारा तैयार किए गए पारंपरिक परिधान और हस्तशिल्प ने सबका ध्यान आकर्षित किया।
मेले में प्रदर्शित कॉटन से बने राजपूती सेट, एप्लिक सूट, कशिदाकारी दुपट्टे, बांधणी की साड़ियां, अज्रक प्रिंट के सूट, ऊनी शॉल, जैकेट, पट्टू और बच्चों के परिधान राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की झलक प्रस्तुत कर रहे हैं। प्रत्येक कृति में लोककला, परंपरा और आधुनिकता का सुंदर संगम झलकता है।
राजीविका की यह पहल ग्रामीण महिलाओं को न केवल आत्मनिर्भर बना रही है, बल्कि स्थानीय शिल्प को नए बाजारों से जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सशक्त कर रही है। सुमंगल–दीपावली मेला 2025 का आयोजन 1 से 12 अक्टूबर तक इंदिरा गांधी पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास संस्थान (आईजीपीआरएस), जयपुर में किया जा रहा है।
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