आईआईटीएफ 2025 में छाईं राजस्थानी जूतियां–मोजड़ियां

300 वर्षों की विरासत बनी आधुनिक ग्राहकों की पहली पसंद

हस्तशिल्प, परंपरा और फैशन का अनूठा संगम बना राजस्थान मंडप

जयपुर। आईआईटीएफ–2025 में इस वर्ष पारंपरिक राजस्थानी हस्तशिल्प ने आगंतुकों का विशेष ध्यान खींचा है। नई दिल्ली के प्रगति मैदान में लगे मेला परिसर में राजस्थान मंडप अपनी रंगीन लोक-संस्कृति, अनूठी कला और विशेष रूप से पारंपरिक जूतियों–मोजड़ियों के कारण आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। बदलते फैशन और आधुनिक डिज़ाइनों के दौर में भी हाथ से बनी देसी जूतियों की मांग लगातार बढ़ रही है, जो इन्हें विशिष्ट बनाती है।

जोधपुर के राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता कारीगर मोहन लाल भाटी ने बताया कि एक जोड़ी जूती तैयार करने में तीन से चार दिन की सूक्ष्म मेहनत लगती है। यह कला उनके परिवार में 300 वर्षों से लगातार चली आ रही है। भाटी न केवल इस विरासत को संजोए हुए हैं, बल्कि युवाओं को भी इससे जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। NIFT जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के विद्यार्थी उनकी कार्यशाला में इंटर्नशिप कर जूती निर्माण की पारंपरिक तकनीकें सीखते हैं।

उन्होंने बताया कि अब उनकी कार्यशाला में क्लासिक जूतियों के साथ-साथ आधुनिक फैशन के अनुरूप नए डिजाइन भी तैयार किए जा रहे हैं। उनका लक्ष्य इस स्वदेशी कला को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाना और नई पीढ़ी में इसे फिर से लोकप्रिय बनाना है।

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