डॉ. रीला होता की प्रस्तुति ने मोहा मन, मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास रहे मुख्य अतिथि, वन्यजीव संरक्षण पर हुई सार्थक चर्चा
जयपुर। जवाहर कला केन्द्र में आयोजित जयपुर टाइगर फेस्टिवल के तीसरे दिन कला, संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण का अद्भुत संगम देखने को मिला। राजस्थान हेरिटेज, आर्ट एंड कल्चरल फाउंडेशन द्वारा जवाहर कला केन्द्र की सहभागिता में आयोजित इस फेस्टिवल में शनिवार की शाम शास्त्रीय नृत्य के नाम रही। प्रसिद्ध ओडिसी नृत्यांगना डॉ. रीला होता और उनके समूह ने अपनी प्रभावशाली प्रस्तुति के माध्यम से पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण का सशक्त संदेश दिया।
कार्यक्रम में राजस्थान के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि जयपुर टाइगर फेस्टिवल वन्यजीव संरक्षण को लेकर समाज में जागरूकता फैलाने का एक महत्वपूर्ण मंच है। इस अवसर पर पर्यटन, कला एवं संस्कृति विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव प्रवीण गुप्ता, जेकेके की अतिरिक्त महानिदेशक प्रियंका राठौड़ सहित कई गणमान्य अतिथि मौजूद रहे।
डॉ. रीला होता ने गणेश वंदना से अपनी प्रस्तुति की शुरुआत की। इसके बाद विशेष रूप से जयपुर टाइगर फेस्टिवल के लिए तैयार की गई ‘देवी पल्लवी’ में भारतीय शास्त्रों में बाघ की महत्ता को भावपूर्ण नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। उत्कृष्ट फुटवर्क, भाव-भंगिमाओं और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
फेस्टिवल के दौरान आयोजित टॉक शो में वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन, फोटोग्राफी और रिवाइल्डिंग पर गहन चर्चा हुई। प्लेबैक सिंगर और संगीतकार अभिषेक रे, वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर अपारूपा डे और सुब्बैया नल्ला मुत्थु ने अपने अनुभव साझा किए। इस अवसर पर गौरव नकरा की पुस्तक ‘स्ट्राइप्स ऑफ सर्वाइवल’ का विमोचन भी किया गया।
फेस्टिवल के अंतिम दिन रविवार को वाइल्डलाइफ फिल्म मेकर सुब्बैया नल्ला मुत्थु की मास्टर क्लास सहित कई विशेष गतिविधियां आयोजित होंगी, जिनके साथ फेस्टिवल का समापन किया जाएगा।
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