WCCB की गोपनीय सूचना पर ऑपरेशन, दो स्थानों पर दबिश, 48 हाथाजोड़ी और 2 ट्रैपर बरामद, विस्तृत अनुसंधान शुरू
मॉनिटर लिजार्ड Schedule-1 प्रजाति, अवैध व्यापार पर 3–7 वर्ष की सजा, अंधविश्वास और तंत्र-मंत्र के नाम पर चल रहा था अवैध व्यापार
बारां। किशनगंज क्षेत्र में वन विभाग बारां ने बुधवार को एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए वन्यजीव तस्करी के खिलाफ कड़ा प्रहार किया। वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB) नई दिल्ली से प्राप्त गोपनीय सूचना के आधार पर टीम ने मॉनिटर लिजार्ड के हाथाजोड़ी के अवैध व्यापार में संलिप्त गिरोह का पर्दाफाश किया।
सूचना की पुष्टि के बाद क्षेत्रीय वन अधिकारी बारां भूपेंद्र सिंह हाडा और क्षेत्रीय वन अधिकारी किशनगंज दीपक शर्मा के नेतृत्व में एक संयुक्त टीम का गठन किया गया। टीम में गिनता कुमारी, वैजयंती मेघवाल, दिनेश कुमार गोचर, भगवान सिंह, सिकंदर मीणा, नवीन, गोपाल सिंह शेखावत, विकास शर्मा, शुभम शर्मा, गिर्राज शर्मा, पवन सहरिया और रामप्रसाद मीणा शामिल थे।
टीम ने किशनगंज क्षेत्र के दो स्थानों पर दबिश दी, जहां वन्यजीवों के अवयवों का अवैध संग्रह और व्यापार छिपकर किया जा रहा था। कार्रवाई के दौरान कुल 48 हाथाजोड़ी Monitor Lizard Hemipenis, 2 ट्रैपर जब्त किए गए और 4 आरोपी गिरफ्तार किए गए। पकड़े गए आरोपियों में 3 राजस्थान और 1 मध्यप्रदेश का निवासी है।
क्षेत्रीय वन अधिकारी किशनगंज दीपक शर्मा ने बताया कि आरोपियों पर राजस्थान वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर विस्तृत अनुसंधान शुरू कर दिया गया है। यह कार्रवाई उप वन संरक्षक बारां, डॉ. सुनील कुमार गौड़ के निर्देशन में की गई।
मॉनिटर लिजार्ड भारत के वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की Schedule-1 अत्यंत संरक्षित प्रजाति है। इसके शिकार, व्यापार, पकड़ने, अवयवों के संग्रह या खरीदी–फरोख्त पर कठोर प्रतिबंध है। ऐसे अपराधों पर 3 से 7 वर्ष तक कारावास और जुर्माना का प्रावधान है। हाथाजोड़ी का अवैध व्यापार प्रायः अंधविश्वास, तंत्र-मंत्र और कथित सौभाग्य से जोड़कर किया जाता है, जो पूर्णतः अवैज्ञानिक, भ्रामक और कानूनन अवैध है।
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