बाजे छम छम छम बाजे घूंघरु, हाथों में दीपक लेकर आरती करु…

जिनके मन में राग द्वेष व अहंकार नहीं होता है उनका कोई शत्रु नहीं होता – मुनि समत्व सागर

रविवार को निकलेगी भरत चक्रवर्ती की दिग्विजय यात्रा

टीम एनएक्सआर जयपुर। सांगानेर थाना सर्किल स्थित चित्रकूट कॉलोनी में मुनि समत्व सागर महाराज ससंघ सानिध्य में चल रहे कल्पद्रुम महामंडल एवं विश्व शांति महायज्ञ में शुक्रवार को समोवशरण में विराजमान जिनेंद्र देव के समक्ष अर्घ्य चढ़ाए गए। वहीं सायंकाल भव्य संगीतमय महाआरती का आयोजन किया गया। जिसमें श्रद्धालु प्रभू की भक्ति में सरोबार हो उठे।

मंदिर समिति अध्यक्ष केवलचंद गंगवाल ने बताया कि कल्पद्रुम महामंडल विधान में समोवशरण में जिनेंद्र प्रभु को अर्घ्य अर्पित कर आत्म कल्याण के साथ विश्व शांति की कामना की गई।
समिति मंत्री अनिल जैन काशीपुरा ने बताया कि सायंकाल महाआरती बघ्घी एवं बैण्डबाजों के साथ पाटनी भवन पंचवटी कॉलोनी से शुरू होकर विभिन्न मर्गों से होती हुई समोवशरण में पहुंची। रास्ते में श्रद्धालुओं द्वारा जैन भजनों की मधुर धुनों पर नृत्य कर भक्ति प्रदर्शित की गई। महाआरती का सौभाग्य अंजना देवी, महावीर सुरेंद्र जैन एडवोकेट निधि, नमोकार, संभव जैन पाटनी परिवार भोज्याडा को प्राप्त हुआ। चांदी की गज थाली से समोवशरण में जिनेंद्र देव की महाआरती की गई।

विधानाचार्य विकर्ष शास्त्री के सानिध्य में विधान के चक्रवर्ती कैलाश चन्द – राजेश देवी सोगानी, सौधर्म इन्द्र मूल चन्द – शांति देवी पाटनी, धनपति कुबेर केवल चन्द – संतोष देवी गंगवाल, महायज्ञ नायक पदम चन्द – चन्द्र कांता सिंघल के नेतृत्व में हजारों इन्द्र – इन्द्राणियों द्वारा विधान पूजन की गईं। इस मौके पर राजस्थान जैन सभा जयपुर के मंत्री विनोद जैन कोटखावदा, संगिनी फारम जेएसजी मेट्रो की संस्थापक अध्यक्ष दीपिका जैन कोटखावदा, सुधीर बाकलीवाल आदि ने कल्पद्रुम महामण्ड़ल विधान में समवशरण के दर्शन किए। मंदिर कमेटी की ओर से सम्मान किया गया।

जिनके मन में राग द्वेष व अहंकार नहीं होता है उनका कोई शत्रु नहीं होता – मुनि समत्व सागर
मुनि श्री ने प्रवचन करते हुए कहा कि ज्येष्ठ व्यक्ति श्रेष्ठ हो यह ज़रूरी नहीं है। वही ज्येष्ठ यानी बड़ा और श्रेष्ठ है जो सबको साथ लेकर चलता हो । सबको साथ लेकर चलने से ज्येष्ठता, श्रेष्ठता में बदल जाती है। जैन धर्म सप्त व्यसनों से दूर रहना सिखाता है। ऐसे में जो समाज का नेतृत्व करते है, उनको सप्त व्यसनों से दूर रहना चाहिए। क्योंकि सप्त व्यसन करने वाले व्यक्ति समाज का भला नहीं कर सकते बल्कि समाज को गर्त में ले जाएंगे। मन एवं विचारों की निर्मलता व्यक्ति को सफलता की ओर ले जाती है।

24 को निकलेगी भरत चक्रवर्ती की दिग्विजय यात्रा
संयोजक ओम प्रकाश कटारिया ने बताया कि मण्डल महाविधान में रविवार को भरत चक्रवर्ती की विशाल दिग्विजय यात्रा निकलेगी जो समोवशरण से प्रारंभ होकर विभिन्न मार्गो से होती हुई नगर भ्रमण करेगी। यात्रा में हाथी, घोड़े, बघ्घियां आदि लवाज़मे के साथ बैंडबाजे के साथ केसरिया वस्त्र धारण किए इंद्रो के साथ श्रावकगण भी हाथो में पताकाये लेकर साथ साथ चलेंगे।

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