अलीना भारती की ग़ज़लों और ओल्ड मेलोडीज़ ने छेड़े एहसास के तार
अश्विन श्रीनिवासन और ओजस अढ़िया की बांसुरी–तबला जुगलबंदी ने श्रोताओं को किया मंत्रमुग्ध
जयपुर। जवाहर कला केन्द्र, जयपुर में रविवार को तीन दिवसीय म्यूज़िकल सिम्फनी कार्यक्रम का आगाज़ हुआ। सुरों और ग़ज़लों की सुमधुर महफिल ने दर्शकों को भावनाओं के समंदर में डुबो दिया। इस मौके पर जयपुर कलेक्टर जितेन्द्र सोनी, केंद्र की अतिरिक्त महानिदेशक प्रियंका राठौड़ और बड़ी संख्या में संगीतप्रेमी मौजूद रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत गायिका अलीना भारती की सुरभरी ग़ज़लों से हुई। उन्होंने मेरी आवाज़ ही मेरी पहचान है, पिया तोसे नैना लागे रे और दिल चीज़ क्या है जैसी रचनाओं से श्रोताओं के दिल जीत लिए। रंजिश ही सही और आज जाने की ज़िद न करो जैसी क्लासिक ग़ज़लों ने माहौल को भावनात्मक ऊंचाईयों पर पहुंचा दिया।
इसके बाद मंच पर आई वो जुगलबंदी जिसका इंतज़ार सभी को था। बांसुरी वादक अश्विन श्रीनिवासन और तबला वादक ओजस अढ़िया की अद्भुत प्रस्तुति ने संगीत प्रेमियों को झूमने पर मजबूर कर दिया। राग पूरियाधनश्री, भूपाली और पायलिया की झंकार जैसी बंदिशों ने महफिल में जादू बिखेर दिया।
अश्विन श्रीनिवासन ऑल इंडिया रेडियो के ए-ग्रेड कलाकार और ए.आर. रहमान बैंड के सदस्य हैं, जबकि ओजस अढ़िया उस्ताद बिस्मिल्लाह खां युवा पुरस्कार से सम्मानित तबला वादक हैं।
कार्यक्रम के दूसरे दिन समंदर खान मांगणियार व समूह लोक और सूफी संगीत की मनमोहक प्रस्तुति देंगे।
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