सर्दियों में प्रवासी परिंदों से सरिस्का का आसमान हुआ रंगीन

वेटलैंड्स की खूबसूरती और समृद्ध जैवविविधता का अनोखा संगम

जयपुर। सर्दियों के आगमन के साथ ही सरिस्का टाइगर रिज़र्व एक बार फिर पक्षी प्रेमियों के लिए स्वर्ग बन गया है। स्वस्थ वन पारिस्थितिकी के प्रतीक इस रिज़र्व में इन दिनों प्रवासी पक्षियों की अनोखी मौजूदगी देखने को मिल रही है। सिलीसेढ़, कर्णकवास, मानसरोवर, हनुमान सागर और किरास्का जैसे जलस्रोतों की समृद्धि यहां 272 से अधिक पक्षी प्रजातियां आकर्षित करती है।

दुनिया के कोनों से पहुंचे पंखों के मेहमान
इस मौसम में मध्य एशिया से बार-हेडेड गूज, मंगोलिया से रड्डी शेलडक, दक्षिण अफ्रीका से जैकोबिन कोयल, चीन–मालदीव से लेसर व्हिसलिंग डक, यूरोप से गार्गनी, साइबेरिया से कॉमन टील और कज़ाकिस्तान–तिब्बत से नॉर्दर्न पिंटेल सरिस्का पहुंच चुके हैं।

आसमान में उड़ान भरते रैप्टर्स
32 रैप्टर प्रजातियों—क्रेस्टेड सर्पेंट ईगल, बोनैलीज़ ईगल, शिकरा, व्हाइट-आइड बज़र्ड सहित—की मौजूदगी सरिस्का के आसमान को और भी जीवंत बना रही है। नवंबर से फरवरी तक का समय बर्डवॉचिंग के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। इस दौरान सरिस्का प्रकृति और पक्षी प्रेमियों को अद्भुत, दुर्लभ और रोमांचकारी अनुभव प्रदान करता है।

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