जयपुर। जवाहर कला केन्द्र में चल रहे 28वें लोकरंग महोत्सव के छठे दिन रविवार को लोक संस्कृति के रंगों ने समूचे परिसर को जीवंत बना दिया। मध्यवर्ती मंच पर देशभर के कलाकारों ने 14 लोक विधाओं की आकर्षक प्रस्तुतियां दीं, जबकि शिल्पग्राम में सजे राष्ट्रीय हस्तशिल्प मेले में आगंतुकों ने दस्तकारों के उत्पादों की जमकर खरीदारी की और पारंपरिक स्वाद का आनंद लिया।
लोक राग और नृत्य से सजी संध्या
गाजी खान बरना और साथियों की मांगणियार गायन प्रस्तुति ने शाम की शुरुआत सुरमयी बना दी। ‘दमादम मस्त कलंदर’ जैसे गीतों पर श्रोतागण झूम उठे। इसके बाद राजस्थान का चरी नृत्य और महाराष्ट्र का सौंगी मुखवटा नृत्य मंच पर हुआ, जिसमें कलाकारों ने विशाल मुखौटों के जरिए पौराणिक कथाओं को साकार कर दर्शकों को रोमांचित किया।
देशभर की विविध लोक शैलियों ने मोहा मन
बांसवाड़ा के होली गैर नृत्य, जैसलमेर के नड़ वादन, उत्तर प्रदेश के पूर्वी नृत्य, गुजरात के तलवार रास और ओडिशा के गोटीपुआ नृत्य ने दर्शकों को लोक धुनों की गहराई में डुबो दिया। राजस्थान की चकरी नृत्य और मध्यप्रदेश की मटकी नृत्य प्रस्तुतियों ने मंच को रंगों और लय से भर दिया।
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