जयपुर में सजी सुहाग की शाम, चांद संग खिला सौंदर्य और आस्था का संगम
जयपुर। कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को शुक्रवार के दिन पूरे श्रद्धा और उल्लास के साथ करवा चौथ का पर्व मनाया गया। अखंड सौभाग्य और पति की दीर्घायु की कामना में सुहागिन महिलाओं ने दिनभर निर्जल-निराहार व्रत रखकर आस्था और प्रेम का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया।
सुबह से ही शहर के मंदिरों और घरों में भक्ति का माहौल रहा। महिलाओं ने स्नान कर व्रत का संकल्प लिया और सोलह श्रृंगार से सजी पारंपरिक पोशाकों में पूरे दिन तैयारियों में रहीं। बाजारों में करवा, साज-सज्जा की वस्तुएं और मेहंदी की रौनक ने पर्व की शोभा बढ़ाई।
शाम को महिलाओं ने घरों और सामूहिक स्थलों पर मां गौरी, भगवान शिव और गणेश की पूजा-अर्चना की। व्रत कथा का पाठ कर करवों में जल, अक्षत और नैवेद्य अर्पित किया गया। जैसे ही रात 8 बजकर 27 मिनट पर चंद्रमा का उदय हुआ, महिलाएं अपने आंगनों और छतों पर उमड़ पड़ीं। चलनी से चांद और फिर पति का दर्शन कर अर्घ्य अर्पित किया गया। इसके बाद पति के हाथों से जल ग्रहण कर व्रत का पारण किया गया।
गीतों और मंगल ध्वनियों के बीच करवा चौथ का यह सुहाग पर्व भक्ति, सौंदर्य और प्रेम के पावन संगम के रूप में सम्पन्न हुआ। शहरभर में उल्लास और सामूहिक पूजन की झलकियां देर रात तक देखने को मिलीं।
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