जयपुर। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि देशभर से पहचान की गई एक करोड़ से अधिक दुर्लभ पांडुलिपियों में से अब तक 2.5 लाख से अधिक पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण किया जा चुका है। आने वाले समय में यह संख्या 10 लाख तक पहुंच जाएगी।
जैसलमेर प्रवास के दौरान मीडिया से रूबरू होते हुए शेखावत ने बताया कि यह पहल भारत की प्राचीन वैदिक, दार्शनिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक विरासत को एआई तकनीक की मदद से कंप्यूटर-रीडेबल फॉर्मेट में सुरक्षित रखने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने कहा कि यह केवल तकनीकी परियोजना नहीं, बल्कि राष्ट्र की सांस्कृतिक सुरक्षा का मिशन है।
उन्होंने बताया कि इस कार्य में देश-विदेश के विशेषज्ञों, विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों की सहभागिता सुनिश्चित की जा रही है ताकि विभिन्न संस्थाओं में संग्रहित धरोहर को एकीकृत किया जा सके।
अपने फ्रांस दौरे पर उन्होंने बताया कि 165 देशों की भागीदारी वाले सांस्कृतिक सम्मेलन में भारत का ‘काशी कल्चर पाथवे’ मॉडल विशेष आकर्षण का केंद्र रहा, जिसने यह संदेश दिया कि कैसे पारंपरिक कला, स्थानीय शिल्प और सांस्कृतिक मूल्यों को आधुनिक विकास से जोड़ा जा सकता है।
शेखावत ने जैसलमेर में आयोजित समीक्षा बैठक में कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर राजस्थान के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं, ताकि प्रत्येक योजना का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।
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