सावन की धुन और विरह का स्वर : लोकरंग के चौथे दिन झूम उठा जयपुर

मांगणियार गायन से शुरू हुआ संगीतमय सफर, विभिन्न राज्यों के लोक नृत्यों ने बांधा समां

जयपुर। जवाहर कला केंद्र में जारी 28वां लोकरंग महोत्सव शुक्रवार को अपने चौथे दिन रंग, रस और राग से सराबोर रहा। करवा चौथ के शुभ अवसर पर भी दर्शकों की भारी भीड़ उमड़ी और मंच लोक कलाओं के विविध रंगों से खिल उठा। शिल्पग्राम में महिलाएं त्योहारी खरीदारी करती नजर आईं, जबकि मंचों पर लोक संगीत और नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियों ने समां बांध दिया।

कार्यक्रम की शुरुआत राजस्थानी मांगणियार गायन से हुई। उस्ताद शाकर सद्दीक खां और उनके समूह ने ढोलक, करताल, भपंग और सारंगी की ताल पर सावन और विरह के गीतों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके बाद हिमाचल प्रदेश के कलाकारों ने ‘रिहालटी-गी’ नृत्य में पहाड़ी संस्कृति का अद्भुत प्रदर्शन किया, वहीं उत्तर प्रदेश के कलाकारों ने ‘ढेड़िया’ नृत्य में ग्रामीण जीवन की झलक दिखाई।

हरियाणा के फाग नृत्य, राजस्थान की आंगी गैर और गरासिया जनजातीय प्रस्तुति, तथा मध्यप्रदेश के गोंड कलाकारों के ‘रीना-सैला’ नृत्य ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर किया। अंत में पंजाब के जिंदवा नृत्य ने पूरे माहौल को उत्सवमय बना दिया।

शिल्पग्राम में लगे राष्ट्रीय हस्तशिल्प मेले में 150 से अधिक स्टॉल्स पर विभिन्न राज्यों के दस्तकारों की कला प्रदर्शित की गई, जहाँ त्योहारों की रौनक चरम पर रही।

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