रात्रिकालीन पेट्रोलिंग, रेडियो कॉलरिंग, विशेषज्ञ ट्रैकिंग और झालाना में सुदृढ़ अवसंरचना, मानव–वन्यजीव संघर्ष रोकने को वन विभाग सतर्क
जयपुर। राजधानी जयपुर में हाल के दिनों में तेंदुए की बढ़ती आवाजाही ने वन विभाग को उच्च सतर्कता मोड पर ला दिया है। वन राज्य मंत्री संजय शर्मा के निर्देशानुसार अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन्यजीव संरक्षक एवं वन्यजीव प्रतिपालक के. सी. अरुण प्रसाद और उपवन संरक्षक, वन्यजीव एवं चिड़ियाघर जयपुर, विजय पाल सिंह के नेतृत्व में तेंदुए की गतिविधियों पर 24×7 निगरानी की जा रही है।
मालवीय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, जगतपुरा, महावीर नगर, सिद्धार्थ नगर, विद्याधर नगर, पुलिस अकादमी और चांदपोल जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में तेंदुए के मूवमेंट दर्ज होने के बाद विभाग ने त्वरित और सशक्त कदम उठाए हैं। 2 दिसंबर 2025 से प्रतिदिन रात 7 बजे से सुबह 7 बजे तक पुलिस PCR मॉडल पर आधारित हाई-इंटेंसिटी रात्रिकालीन पेट्रोलिंग टीम तैनात की गई है। यह टीम जाल, टॉर्च और वायरलेस उपकरणों सहित सभी आवश्यक साधनों से लैस है और लगातार गश्त कर रही है।
मानव–वन्यजीव संघर्ष की आशंका को ध्यान में रखते हुए विभाग ने विशेषज्ञ स्तर की ट्रैकिंग भी शुरू की है। इसके लिए रणथम्भौर टाइगर रिज़र्व, सवाई माधोपुर से अनुभवी ट्रैकर्स बुलाए गए हैं, साथ ही स्थानीय स्टाफ को भी प्रशिक्षित किया गया है। रोजाना तैयार की जा रही मूवमेंट रिपोर्ट की मॉनिटरिंग वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा की जा रही है।
वन विभाग तेंदुए की गतिविधियों की वैज्ञानिक मॉनिटरिंग को और मजबूत करने की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। आने वाले दिनों में 2 से 3 तेंदुओं को रेडियो कॉलर लगाने की तैयारी पूरी कर ली गई है, जिससे उनके मार्ग और विचरण क्षेत्र का सटीक विश्लेषण हो सकेगा।
इसी के तहत झालाना कंज़र्वेशन रिज़र्व में क्षतिग्रस्त बाड़ की मरम्मत तेज़ी से की जा रही है। इसके अलावा दीवार के अंदरूनी हिस्से में पेरीफेरल पेट्रोलिंग ट्रैक विकसित करने का प्रस्ताव भी अंतिम चरण में है। अधिकारियों के अनुसार ये कदम तेंदुए की गतिविधियों की बेहतर निगरानी और मानव–वन्यजीव संघर्ष में उल्लेखनीय कमी सुनिश्चित करेंगे।
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